आत्म सम्मान कैसे बचाएं

आत्म सम्मान क्या है



 स्वाभिमान का एक स्वस्थ स्तर आपको दृढ़ सीमाएं निर्धारित करने का आत्मविश्वास प्रदान करता है।  इसका अर्थ है यह जानना कि आप किसके लिए खड़े हैं और आपके मूल्य क्या हैं, और अपनी ताकत और कमजोरियों दोनों को स्वीकार करना।  स्वाभिमान एक आंतरिक गुण है जिसे विकसित होने में प्रत्येक व्यक्ति को समय लेना चाहिए





 जीवन में स्वाभिमान की गुणवत्ता का महत्व



 स्वाभिमान का एक स्वस्थ स्तर आपको दृढ़ सीमाएं निर्धारित करने के लिए आत्मविश्वास रखने में सक्षम बनाता है।  इसका अर्थ है यह जानना कि आप किसके लिए खड़े हैं और आपके मूल्य क्या हैं, और अपनी ताकत और कमजोरियों दोनों को स्वीकार करना।

 स्वाभिमान एक आंतरिक गुण है जिसे विकसित होने में प्रत्येक व्यक्ति को समय लेना चाहिए।  यह जीवन भर असफलताओं और असफलताओं का अनुभव करने और पुनर्निर्माण करने का तरीका जानने के बाद आता है।

 बढ़ते परिवार और व्यस्त नेतृत्व भूमिकाओं की माँगों को पूरा करना लोगों के लिए अजीबोगरीब काम कर सकता है।  यह सोचकर धोखा दिया जाना आसान है कि सफल होने का तरीका सभी को खुश करने का प्रयास करना है।  हमेशा एक अच्छे इंसान के रूप में देखे जाने की तुलना में आत्म-सम्मान अधिक महत्वपूर्ण है।  कभी-कभी इसका मतलब यह होता है कि आप अपने बच्चे की स्कूल सभा में भाग लेने के लिए स्वतंत्र होने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक पर बातचीत करने और पुनर्निर्धारित करने का साहस रखते हैं।

 महामारी के इस दौर में दूसरों के स्वाभिमान को कैसे बचाएं मैं आपको एक कहानी बताना चाहता हूं जिससे आपको दूसरों के आत्म सम्मान को बचाने की शुरुआत करनी चाहिए



टूटी_चप्पल

*"पता नहीं ये सामने वाला सेठ हफ्ते में 3-4 बार अपनी चप्पल कैसे तोड़ लाता है?"* मोची बुदबुदाया, नजर सामने की बड़ी किराना दूकान पर बैठे मोटे सेठ पर थी। हर बार जब उस मोची के पास कोई काम ना होता तो उस सेठ का नौकर सेठ की टूटी चप्पल बनाने को दे जाता। मोची अपनी पूरी लगन से वो चप्पल सी देता की अब तो 2-3 महीने नहीं टूटने वाली। सेठ का नौकर आता और बिना मोलभाव किये पैसे देकर उस मोची से चप्पल ले जाता। पर 2-3 दिन बाद फिर वही चप्पल टूटी हुई उस मोची के पास पहुंच जाती। 
आज फिर सुबह हुई, फिर सूरज निकला। सेठ का नौकर दूकान की झाड़ू लगा रहा था। और सेठ........ अपनी चप्पल तोड़ने में लगा था ,पूरी मश्शकत के बाद जब चप्पल न टूटी तो उसने नौकर को आवाज लगाई। "अरे रामधन इसका कुछ कर, ये मंगू भी पता नहीं कौनसे धागे से चप्पल सिलता है, टूटती ही नहीं।"रामधन आज सारी गांठे खोल लेना चाहता था *"सेठ जी मुझे तो आपका ये हर बार का नाटक समझ में नहीं आता। खुद ही चप्पल तोड़ते हो फिर खुद ही जुडवाने के लिए उस मंगू के पास भेज देते हो।"*

सेठ को चप्पल तोड़ने में सफलता मिल चुकी थी। उसने टूटी चप्पल रामधन को थमाई और रहस्य की परते खोली... *"देख रामधन जिस दिन मंगू के पास कोई ग्राहक नहीं आता उसदिन ही मैं अपनी चप्पल तोड़ता हूं... क्यों की मुझे पता है... मंगू गरीब है... पर स्वाभिमानी है, मेरे इस नाटक से अगर उसका स्वाभिमान और मेरी मदद दोनों शर्मिंदा होने से बच जाते है तो क्या बुरा है।* "आसमान साफ था पर रामधन की आँखों के बादल बरसने को बेक़रार थे।  
        लाकडाउन के कारण हमारे आसपास आज ऐसे अनेकों परिवार होंगे जिनके रोजगार छूट गये होंगे।अपने आसपास के किसी एक की चिंता यदि हम कर सकें तो बहुत बड़ी समस्या के समाधान में हम सहायक हो सकते हैं।सम्बन्धित पोस्ट के लिए किल्क करें

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